मेहर की नजर करो मेरी ओर
मेहर की नजर करो मेरी ओर। दया की नजर करो मेरी ओर।।१।।
निशदिन तुम्हे निहारूं सतगुरु जैसे चन्द्र चकोर। दया की नजर करो मेरी ओर।।२।।
जानू न कौन भूल हुई तन से लियो हमसे मुख मोड़। दया की नजर करो मेरी ओर।।३।।
बालक जानी चूक बिसराओ आया शरण अब मैं तोर, दया की नजर करो मेरी ओर।।४।।
सदा दयालु स्वभाव तुम्हारा मेरी बेरिया कस भयहुं कठोर, दया की नजर करो मेरी ओर।।५।।
शरणागत की लाज न राखो मो सो पतित अब जाए केहि ओर, दया की नजर करो मेरी ओर।।६।।
अबकी बार उबार लेव जो फिर न धरब पग एही मग ओर, दया की नजर करो मेरी ओर।। मैहर की नजर करो मेरी ओर।।७।।