जयगुरुदेव आश्रम में नाम योग साधना और प्रकृति संरक्षण पर हुआ सत्संग

मथुरा में जारी है चौदहवां वार्षिक भण्डारा सत्संग मेला

मथुरा स्थित जयगुरुदेव आश्रम में चल रहे चौदहवें वार्षिक भण्डारा सत्संग मेला के दूसरे दिन राष्ट्रीय उपदेशक बाबूराम जी एवं सतीश चन्द्र जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सृष्टि रचना, आत्मा के कल्याण और नाम योग साधना के महत्व पर प्रकाश डाला।

सतलोक और काल देश की रचना पर चर्चा

उपदेशकों ने बताया कि सृष्टि विस्तार के दो भाग हैं — पहला सतलोक की रचना और दूसरा काल देश की रचना। उन्होंने कहा कि काल प्रभु ने चौथे पद सतपुरुष का भेद गुप्त कर पाप-पुण्य तथा विविध पूजा-पाठ के माध्यम से जीव को भ्रमित कर दिया, जिसके कारण मनुष्य सुरत-शब्द के वास्तविक भेद को भूल गया।

उन्होंने कहा कि संतों ने सुरत-शब्द के भेद को “पांचवां वेद” बताया है, जबकि चारों वेदों में केवल ब्रह्म तक का उल्लेख मिलता है, सतलोक का नहीं।

मानव जीवन और प्रकृति के प्रति चेतावनी

सत्संग में कहा गया कि मानव जन्म आत्मा की रक्षा और परमात्मा की प्राप्ति के लिए मिला है, लेकिन मनुष्य भौतिक विकास और शरीर की सुविधाओं में ही उलझ कर रह गया है। वक्ताओं ने कहा कि जितना अधिक मनुष्य प्रकृति के करीब रहेगा, उतना ही सुखी रहेगा।

बाबूराम जी ने बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के “भूमिजोतक खेतिहर काश्तकार संगठन” के संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं और बीमारियों के समय गांव अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने बढ़ते प्रदूषण, घटते वन क्षेत्र और शहरों में बढ़ते तापमान को मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बताया।

“प्रकृति पार प्रभु सब उर वासी”

“प्रकृति पार प्रभु सब उर वासी” पंक्ति का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि परमात्मा प्रकृति के पार रहते हुए भी प्रत्येक जीव के हृदय में विद्यमान है। इसे समझाने के लिए सूर्य और जल से भरे घड़ों का उदाहरण दिया गया।

सत्संग में बाबा जयगुरुदेव जी महाराज की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए बताया गया कि जीवात्मा की बैठक शरीर के भीतर दोनों आंखों के मध्य भाग के पीछे “दो दल कमल” पर होती है तथा शरीर के विभिन्न चक्रों पर उसका प्रकाश फैला रहता है। नाम योग साधना के अभ्यास से इस प्रकाश का सिमटाव नियंत्रित होता है और मृत्यु की पीड़ा से बचाव संभव होता है।

19 मई को पंकज जी महाराज बताएंगे नाम योग साधना का भेद

आश्रम की ओर से जानकारी दी गई कि 19 मई को प्रातः 5 बजे पूज्य पंकज जी महाराज अपने सत्संग में नाम योग साधना का भेद विस्तार से बताएंगे। मेला परिसर में श्रद्धालुओं के आने का क्रम लगातार जारी है।